छिंदवाड़ा : छोटी सी जगह या छत के ऊपर भी मछली पालन किया जा सकता है. यह सुनकर नामुमकिन लगता है, लेकिन एक ऐसी तकनीक है, जिसने अब मछली पालन को बिल्कुल आसान कर दिया है. घर के (amazing technique) आंगन में या फिर छत में मछली पालन कर लाखों रुपए कमाए जा सकते हैं.
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना बनी वरदान
साल 2020 में सरिता ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत बायोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन करने के लिए मत्स्य विभाग से योजना का लाभ लिया. साल में दो बार मछली उत्पादन होती है, एक बार में करीब 1 लाख रुपए तक का खर्च आता है और आमदनी 5 से 6 लाख रुपए होती है. इस तरह साल में करीब 10 लाख रुपए अब सरिता सिंगारे कमा रही है.
बायोफ्लॉक तकनीक
बायोफ्लॉक टेक्निक में छोटी सी जगह में लोहे की जाली के टैंक बनाए जाते हैं. इन टैंकों को विशेष तरीके से त्रिपाल से कवर किया जाता है, ताकि पानी लीकेज ना हो. जिसके बाद इनमें मछली के बीज डाल दिए जाते हैं. मछली करीब 6 महीने के भीतर बाजार में बिकने के लायक हो जाती है. इन टैंकों में मौसम के अनुसार टेंपरेचर को मेंटेन करने के लिए हीटर और ऑक्सीजन मशीन लगानी पड़ती है, ताकि मछलियों को उनके जीवन अनुसार वातावरण मिल सके.
कैसे करें आवेदन
पीएम मत्स्य संपदा योजना का लाभ पाने के लिए राज्य के मत्स्य विभाग की वेबसाइट या अंत्योदय-सरल जैसे पोर्टल के जरिये ऑनलाइन आवेदन करना होगा, रजिस्ट्रेशन के बाद आवेदन पत्र भरकर आवश्यक दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, भूमि रिकॉर्ड आदि अपलोड करने होते हैं, जिसमें तालाब निर्माण, मछली बीज संवर्धन,(amazing technique) कोल्ड स्टोरेज और रंगीन मछली उत्पादन जैसी गतिविधियों के लिए सब्सिडी मिलती है.


