पाकिस्तान में पूर्व पीएम इमरान खान को लेकर सियासी तूफान मचा हुआ है. पीटीआई पार्टी लगातार उनसे मुलाकात की मांग कर रही है. इसी के साथ जेल के बाहर प्रदर्शन भी किए. खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी के सेंट्रल जेल रावलपिंडी (अडियाला जेल) के बाहर रातभर धरना देने के कुछ दिनों बाद, पाकिस्तान (protest against Imran Khan) के जूनियर कानून और न्याय मंत्री बैरिस्टर अकील मलिक ने कहा कि खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन लगाने पर विचार किया जा रहा है.
protest against Imran Khan – उन्होंने केपी प्रांत में “सुरक्षा और शासन से जुड़ी समस्याओं” को गवर्नर शासन लागू करने का कारण बताया. जियो न्यूज के एक कार्यक्रम में बोलते हुए मलिक ने कहा कि अफरीदी और उनकी टीम “किसी भी तरह की कामकाजी स्थिति बनाने में बुरी तरह असफल रही है.”
क्यों लगाया जा सकता है गवर्नर रूल?
डॉन के मुताबिक, मलिक ने कहा, “न तो वो (केपी सरकार) किसी तरह का समन्वय या तालमेल केंद्र के साथ रखना चाहते हैं और न ही उन क्षेत्रों में कोई कार्रवाई करते हैं जहां इसकी जरूरत होती है.” मलिक ने कहा,”केपी के हालात खुद इस बात की मांग करते हैं कि इस संबंध में कदम उठाया जाए, ताकि वहां प्रशासनिक ढांचा सुनिश्चित किया जा सके.” मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान सरकार केपी में गवर्नर शासन लगाने के विकल्प पर “गंभीरता से विचार” कर रही है.
कैसे लगाया जाता है गवर्नर शासन?
राज्य मंत्री (MoS) ने कहा कि केपी में गवर्नर शासन लागू करना एक संवैधानिक कदम है, जिसे सिर्फ “पूर्ण आवश्यकता” की स्थिति में उठाया जाता है. पाकिस्तान में गवर्नर शासन प्रधानमंत्री की सलाह पर संविधान के अनुच्छेद 232 और 234 के तहत लगाया जाता है और ऐसा फैसला लेने का अधिकार सिर्फ राष्ट्रपति के पास होता है.


