महाराष्ट्र के पूर्व कैबिनेट मंत्री और एनसीपी नेता नवाब मलिक के लिए आज का दिन अहम साबित हो सकता है. मंगलवार को विशेष PMLA कोर्ट फरवरी 2022 में दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मलिक और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर सकती है. कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि आरोप तय होने के दौरान आरोपी (Nawab Malik’s problems increased) की उपस्थिति अनिवार्य होगी. मलिक फिलहाल जमानत पर हैं, लेकिन उन्हें मंगलवार को कोर्ट में पेश होना होगा.
वहीं, कोर्ट ने पिछली सुनवाई में मलिक की कंपनी, मलिक इंफ्रास्ट्रक्चर, की डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी थी. कंपनी ने तर्क दिया कि ईडी का मामला केवल अनुमान और कल्पना पर आधारित है और कथित लेनदेन के समय कंपनी अस्तित्व में नहीं थी. हालांकि, विशेष न्यायाधीश सत्यनारायण आर. नवंदर ने माना कि प्रथम दृष्टया सबूत रिकॉर्ड में मौजूद हैं. कोर्ट ने कहा कि नवाब मलिक ने डी-कंपनी से जुड़े व्यक्तियों – हसीना पारकर, सलीम पटेल और सरदार खान के साथ मिलकर मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों को वैध बनाने में भूमिका निभाई. यह संपत्ति अपराध की आय के दायरे में आती है.
नवाब मलिक ने कोर्ट से आरोप तय करने की प्रक्रिया छह सप्ताह के लिए स्थगित करने का अनुरोध किया, क्योंकि उनकी आपराधिक रिट याचिका बॉम्बे हाई कोर्ट में लंबित है. उनके वकील तारक सईद ने आरोप लगाया कि ईडी ने कुछ जब्त किए गए दस्तावेज छिपाए हैं जो उनके बचाव के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं. लेकिन अभियोजन पक्ष ने इसका कड़ा विरोध किया.
Nawab Malik’s problems increased – वहीं ईडी के अनुसार, नवाब मलिक ने मुंबई के कुर्ला में लगभग 3 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा किया. जमीन हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया. इस पूरे लेन-देन में दाऊद इब्राहिम की बहन हसीना पारकर का नाम शामिल है. कुल ₹16 करोड़ की संपत्ति को “अपराध की कमाई” बताया गया है. यह मामला 2022 से लंबित है.

