
जिला उपभोक्ता फोरम उज्जैन
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हरियाणा के जींद के गांव करसोला निवासी किसान देवेंद्र को तीन साल तक बिजली कनेक्शन नहीं देने पर जिला उपभोक्ता फोर्म ने बिजली निगम पर 60 हजार रुपये हर्जाना और एक महीने में बिजली कनेक्शन देने के निर्देश दिए हैं। यदि एक महीने में राशि नहीं दी तो 12 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा।
गांव करेला निवासी किसान देवेंद्र ने 8 जुलाई 2019 को अपने खेत में कनेक्शन के लिए बिजली निगम को आवेदन किया था। मौके पर ही सिक्योरिटी राशि व दस्तावेज जमा करवा दिए थे। बाद में निगम अधिकारियों ने उनके खेत तक कनेक्शन देने के लिए एक लाख 99 हजार 370 रुपये का एस्टीमेट बनाया। यह राशि भी देवेंद्र ने निगम में जमा करवा दी। 13 मई 2020 को उन्हें सर्विस कनेक्शन जारी कर दिया, लेकिन अभी तक उनके यहां कोई कनेक्शन शुरू नहीं किया गया।
देवेंद्र ने खेत में बिजली कनेक्शन मिलने की उम्मीद में ट्यूबवेल भी लगवा लिया। देवेंद्र ने निगम अधिकारियों से बार-बार पानी के बिना फसल सूखने का हवाला देकर बिजली कनेक्शन शुरू करवाने का अनुरोध किया गया, लेकिन निगम ने कनेक्शन शुरू नहीं किया। इसके बाद देवेंद्र ने उपभोक्ता फोरम की शरण ली। उपभोक्ता फोरम ने निगम से देरी का कारण पूछा। इस पर निगम ने जो जवाब दिया, उससे अदालत संतुष्ट नहीं हुई।
लापरवाह अधिकारियों को अपने पास से चुकानी होगी राशि
उपभोक्ता फोर्म के अध्यक्ष एके सरदाना, सदस्य नीरू अग्रवाल और जेडी गोयल ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह निगम अधिकारियों की लापरवाही है, जिस कारण किसान को आर्थिक, मानसिक व शारीरिक कष्ट हुआ। इसलिए बिजली निगम को किसान को 50 हजार रुपये आर्थिक हानि की एवज में, 10 हजार रुपये मानसिक व शारीरिक परेशानी के लिए देने होंगे। यह पैसा जिन अधिकारियों की लापरवाही हो, उनको देना पड़ेगा। किसान के खेत में एक महीने में बिजली कनेक्शन भी जोड़ना होगा। यदि इस दौरान निगम ने यह राशि किसान को नहीं दी तो 12 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ हर्जाना देना होगा।

