सागर : बिहार के ‘माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी की तर्ज पर मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड अंचल (सागर जिला) में एक बार फिर स्वाभिमान और जिजीविषा की अनोखी कहानी सामने आई है। सागर जिले की नरयावली (MP’s Dashrath Manjhi) विधानसभा के इमलिया गांव निवासी 71 वर्षीय अजब सिंह आदिवासी ने 7 वर्षों तक निरंतर अथक परिश्रम कर अपनी ही जमीन पर विशाल कुआं खोद डाला। एक दिन पानी भरने के दौरान जब अजब सिंह की पत्नी का अपमान किया गया, तो आहत होकर उन्होंने अकेले ही अपनी मेहनत से कुआं खोदने का दृढ़ संकल्प ले लिया।

 MP’s Dashrath Manjhi – अजब सिंह को अपनी जवानी के दिनों में 2 एकड़ सरकारी जमीन का पट्टा मिला था। गांव में भीषण जलसंकट को देखते हुए उन्होंने कुआं निर्माण की सरकारी योजनाओं का लाभ पाने हेतु ग्राम पंचायत के सरपंच से लेकर जनपद पंचायत और कलेक्टर कार्यालय तक गुहार लगाई। किंतु हर बार प्रशासनिक उदासीनता और सरकारी लालफीताशाही के चलते उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। बार-बार दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद जब कोई सरकारी मदद नहीं मिली, तो उन्होंने स्वयं अपने दम पर कुआं खोदने की ठान ली।

 निजी कुएं पर सहना पड़ा था अपमान का घूंट 

अजब सिंह की धर्मपत्नी सदारानी बताती हैं कि जब उनकी बेटियां बहुत छोटी थीं, तब पूरा गांव पानी की बूंद-बूंद को तरसता था।लोग छोटे-छोटे नालों का गंदा पानी छानकर पीने को मजबूर थे। एक दिन जब वे गांव के एक दबंग के निजी कुएं पर पानी भरने गईं, तो उन्हें बुरी तरह अपमानित कर भगा दिया गया। सदारानी ने घर आकर यह बात अपने पति को बताई। पत्नी के इस अपमान ने अजब सिंह के अंदर आत्मसम्मान की ज्वाला जला दी और उन्होंने उसी दिन से बिना किसी की मदद के फावड़ा-कुदाल उठाकर जमीन खोदना शुरू कर दिया।

 7 साल की कड़ी मेहनत रंग लाई

अजब सिंह याद करते हैं कि उन्होंने दिन-रात एक करके कुएं की खुदाई की। यदि रात में चांदनी होती थी, तो वे रात भर भी कुआं खोदते रहते थे। शुरुआती वर्षों में भारी मानसून के कारण खोदे गए गड्ढे में बार-बार मिट्टी भर जाती थी और मलबा साफ करने में भारी मशक्कत करनी पड़ती थी। किंतु उन्होंने कभी हार नहीं मानी। अपनी जमा पूंजी लगाकर और 7 सालों तक लगातार पसीना बहाकर उन्होंने जमीन के सीने से मीठा पानी निकाल ही लिया।

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