मुंबई (महाराष्ट्र): मुंबई पुलिस ने 26/11 आतंकी हमलों के मुख्य षड्यंत्रकारियों और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के संस्थापक हाफिज सईद तथा जकी-उर-रहमान लखवी सहित 6 पाकिस्तानी भगोड़ों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) से संपर्क किया है।
विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने विशेष अदालत में इस संदर्भ में अंतरिम रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि इन फरार आरोपियों के खिलाफ इंटरपोल के माध्यम से प्रोक्लेमेशन ऑर्डर तामील कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिससे उनकी गैर-मौजूदगी (In Absentia) में मुकदमा चलाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
⚖️ BNSS की धारा 356 के तहत आरोपियों की गैर-मौजूदगी में पहली बार चलेगा ट्रायल
नए कानून के तहत अभियोजन प्रक्रिया के मुख्य बिंदु:
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BNSS धारा 356 का प्रयोग: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 356 के प्रावधानों के तहत किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय आतंकी मामले में पहली बार आरोपियों की अनुपस्थिति में पूरा क्रिमिनल ट्रायल संचालित किया जा रहा है।
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90 दिनों में साक्ष्य प्रस्तुति: नए नियमों के अनुसार, अदालत में औपचारिक प्रक्रिया शुरू होने के 90 दिनों के भीतर इन सभी 6 पाकिस्तानी आतंकियों के खिलाफ ठोस डिजिटल और दस्तावेजी सबूत पेश किए जाएंगे।
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3 साल में अंतिम फैसला: अदालत कानूनी मानकों के तहत इन भगोड़ों के बचाव का पूरा अवसर देगी और साक्ष्य दर्ज करने के बाद फैसला सुनाएगी; यदि आरोपी 3 साल के भीतर पेश नहीं होते हैं, तो यह फैसला अंतिम और बाध्यकारी माना जाएगा।
🌐 ‘पाकिस्तान ने आतंकियों को बच्चों की तरह बचाया, फैसले से बनेगा अंतरराष्ट्रीय दबाव’: उज्ज्वल निकम
विशेष लोक अभियोजक के मुख्य तर्क:
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भारत के खिलाफ युद्ध: उज्ज्वल निकम ने कहा कि अजमल कसाब और उसके 9 साथियों द्वारा मुंबई पर किया गया हमला भारत के खिलाफ सुनियोजित युद्ध था, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय की मुहर लग चुकी है।
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डेविड हेडली के साक्ष्य: सरकारी गवाह बने डेविड कोलमैन हेडली और कसाब के बयानों से पाकिस्तान स्थित इन 6 हैंडलर्स की सीधी भूमिका साबित हुई है।
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वैश्विक स्तर पर घेराबंदी: उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वतंत्र भारतीय न्यायपालिका द्वारा फैसला आने के बाद भारत सरकार के लिए पाकिस्तान पर कूटनीतिक व अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाना बेहद प्रभावी और आसान हो जाएगा।
🎯 भारत का बड़ा दांव: इन 6 पाकिस्तानी भगोड़ों के खिलाफ जारी हुए हैं प्रोक्लेमेशन ऑर्डर
मुकदमे के दायरे में शामिल प्रमुख आतंकी और पृष्ठभूमि:
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6 मुख्य भगोड़े आरोपी: अदालत द्वारा हाफिज सईद, जकी-उर-रहमान लखवी, साजिद मीर, अबू अलकामा, आसिम उर्फ अबू कहाफा और मेजर अब्दुर रहमान पाशा के खिलाफ प्रोक्लेमेशन ऑर्डर जारी किए गए हैं।
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कसाब को 2012 में फांसी: 26/11 के हमलों के दौरान जिंदा पकड़े गए एकमात्र आतंकी अजमल कसाब को 21 नवंबर 2012 को पुणे की यरवदा जेल में फांसी दी जा चुकी है।
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166 निर्दोषों की शहादत: 26 नवंबर 2008 को 10 पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा 60 घंटे से अधिक समय तक किए गए इस हमले में 6 अमेरिकी नागरिकों सहित कुल 166 बेकसूर लोगों की जान गई थी।


