रांची : बजट सत्र के दौरान सदन के अंदर और बाहर विपक्ष की उदासीनता इन दिनों सियासी गलियारे में चर्चा का विषय बना हुआ है. राज्यपाल के अभिभाषण से 18 फरवरी से शुरू हुई सदन की (mysterious silence of opposition) कार्यवाही में इस बार विपक्ष के द्वारा अभिभाषण के चर्चा पर कोई संशोधन नहीं लाया जाना भी सवालों में है. एनडीए की बैठक की बात तो दूर यह पहला मौका है जब विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी विधायक दल की बैठक भी बजट सत्र को लेकर नहीं बुलाई गई.
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mysterious silence of opposition – सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के चेंबर में विधायक दल की बैठक कर औपचारिकता निभाई गई. 17 दिनों के इस बजट सत्र में सात दिनों का कार्य दिवस पूर्ण हो चुका है. ऐसे में शेष बचे कार्य दिवस में उम्मीद की जा रही है कि विपक्ष के रुख में होली के बाद कोई बदलाव होता दिखेगा.
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सदन में विपक्षी विधायकों के रुख पर सत्तापक्ष भी हतप्रभ है. जेएमएम विधायक दशरथ गगराई कहते हैं कि यह पहला मौका है जब विपक्ष इतना सुस्त है. उन्होंने कहा कि 2014 से सदन की कार्यवाही को देख रहे हैं, लेकिन पहली बार यह देखा जा रहा है कि विपक्ष की भूमिका जो होनी चाहिए जिससे सदन की गरिमा और बढ़े वैसा नहीं है. उन्होंने कहा कि एक कारण नगर निकाय चुनाव भी है. उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव में कई माननीय सदस्यों के परिवार के लोग भी खड़े हैं. कल चुनाव परिणाम आ जाएगा तो उसके बाद सब कुछ सामान्य हो सकता है.
