झारखंड के हजारीबाग जिले से ममता को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है. मां ने बेटे की बीमारी को ठीक करने के लिए अपनी ही बेटी को एक तांत्रिक को सौंप दिया. फिर तांत्रिक ने उस (the height of superstition) लड़की की बलि दे दी. पुलिस ने इस मामले में मृतका की मां, एक तांत्रिक महिला और एक अन्य सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया है.
मामला कुसुमभा गांव का है. जांच में खुलासा हुआ कि ये पूरी वारदात एक बीमार बच्चे को ठीक करने के नाम पर किए गए नरबलि अनुष्ठान का हिस्सा थी. पुलिस के अनुसार, आरोपी रेशमी देवी (35) अपने छोटे बेटे की शारीरिक और मानसिक बीमारियों को लेकर परेशान रहती थी. इसी दौरान वह गांव की ही एक तांत्रिक शांति देवी (55) के संपर्क में आई. तांत्रिक ने रेशमी को विश्वास दिलाया कि यदि वह किसी कुंवारी कन्या की बलि देगी, तो उसका बेटा पूरी तरह स्वस्थ हो जाएगा. अपने ही बेटे की जान बचाने की चाहत में मां ने अपनी 13 साल की बेटी को मौत के घाट उतारने की साजिश रच डाली.
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यह भयावह घटना 24 मार्च यानी नवरात्र की अष्टमी की रात को हुई. जब पूरा गांव रामनवमी के मंगला जुलूस के जश्न में डूबा हुआ था, तब तांत्रिक शांति देवी के घर पर इस मासूम का गला घोंट दिया गया. पुलिस जांच में पता चला है कि इस कृत्य में भीम राम नामक व्यक्ति ने भी साथ दिया. अनुष्ठान के नाम पर बच्ची के साथ बर्बरता की गई और बाद में उसके शव को एक बगीचे में दफन कर दिया गया.
the height of superstition – शुरुआत में आरोपियों ने मामले को दुष्कर्म का रूप देकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की. मां ने खुद बेटी के अपहरण की झूठी कहानी रची. हालांकि, पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट ने इन दावों को खारिज कर दिया. हजारीबाग के एसपी अंजनी अंजन ने बताया कि कड़ाई से पूछताछ के बाद तीनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है.
