छतरपुर छतरपुर जिले के नौगांव में अंग्रेजों द्वारा बसाई गई पुरानी छावनी आज भी ब्रिटिश हुकूमत की याद दिलाती है. इसे देखकर लोग दंग रह जाते है, उन्ही में से एक अंग्रेजी हुकूमत के दौरान का पुल आज (engineering of the British) भी चालू है. इस पुल से रोजाना हजारों वाहन निकलते हैं. 136 साल बाद भी ये पुल सीना ताने खड़ा है. जानकरों का कहना है “अंग्रेजों ने लोगों पर जुल्म तो बहुत किया लेकिन ब्रिटिश हुकूमत ने भ्रष्टाचार नहीं किया, जिसकी आज भी निशानियां मौजूद हैं.”

नौगांव पर कब्जा करने अंग्रेजों ने चली चाल

जैतपुर के महाराजा परीक्षित को हराने के लिए ब्रिटिश हुकूमत में कई बार योजनाएं बनाईं लेकिन सफल नहीं हो सके तो अंग्रेजी हुकूमत ने नौगांव डेरा डाल कर छावनी में तब्दील कर दिया. छतरपुर जिले के नौगांव की नींव 183 साल पहले अंग्रेजी हुकूमत के दौरान 1842 में रखी गई थी. छतरपुर जिले का नौगाव पुरानी छावनी है. नौगांव केवल ईंट-पत्थरों का नगर नहीं है. यह एक ऐसा शहर है, जिसमें संघर्ष, योजना और सांस्कृतिक वैभव की झलक आज भी दिखाई देती है.

ब्रिटिशकालीन पुल आज भी मजबूत

ब्रिटिश शासन के समय नौगांव को बुंदेलखंड की धड़कन माना जाता था और आज भी इसकी गलियों में अतीत की कहानियां बसती हैं. प्रदेश में सबसे ज्यादा चौराहे वाला नगर भी कहा जाता है नौगांव. यहां आज भी ब्रिटिश काल की कई इमारतें और पुल मौजूद हैं. उन्हीं में से एक भड़ार नदी का पुल. इसे अंग्रेज हुकूमत के दौरान बनाया गया था, जो आज भी सीना ताने मजबूती से खड़ा है. नौगांव शहर से गुजरे रीवा-ग्वालियर नेशनल हाइवे के पुराने मार्ग पर यह पुराना ब्रिटिशकालीन पुल आज भी इस्तेमाल हो रहा है.

साल 1889 में बना था भड़ार नदी पर पुल

भड़ार नदी पर ये पुल 1889 में ठेकेदार राय साहब गंगाराम द्वारा बनवाया गया था. यह पुल भड़ार नदी पर लोहे के गार्डर, ईंट, चूना और पत्थरों से बना हुआ है. इस पुल से आज भी रोजाना करीब 5 हजार (engineering of the British) भारी मालवाहक, बसें, कार और बाइक गुजरती हैं, लेकिन अंग्रेजी हुकूमत का पुल खड़ा हुआ है. नेशनल हाइवे 75 पर भड़ार नदी के पुल का निर्माण ब्रिटिश शासनकाल में इसलिए करवाया था जिससे झांसी से सतना, रीवा और नौगांव को जोड़ने का एकमात्र साधन था.

 

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