सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। यह नाराजगी बंधक बनाए गए हाथी ‘उत्तोली रमन’ की सुरक्षा और भलाई के लिए उठाए गए कदमों का सही ब्योरा अदालत के सामने पेश न करने पर जताई गई है। कोर्ट ने केरल के इस दावे पर गंभीर सवाल उठाए कि उसने पिछले 9 जून के आदेश के तुरंत बाद हाथी की कस्टडी अपने हाथ में ले ली थी। एससी (Supreme Court) ने कड़े शब्दों में पूछा कि इस अहम बात का जिक्र सरकार के हलफनामे में क्यों नहीं किया गया? गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल जून में हाथी की कस्टडी राज्य सरकार को सौंपने का निर्देश दिया था।

⚖️ “क्या चुनाव के कारण कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया गया?”

न्यायालय में सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने राज्य सरकार के वकील से तीखे सवाल पूछे:

  • “आप 9 जून से क्या कर रहे थे? जून के बाद क्या कार्रवाई हुई? आपके हलफनामे में यह बात कहां दर्ज है?” जब राज्य के वकील ने कोर्ट के आदेश में देरी की मुख्य वजहों में से एक वजह ‘केरल में विधानसभा चुनाव’ को बताया, तो सुप्रीम कोर्ट ने इस पर गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट ने तंज कसते हुए कहा कि यह तो बहुत बढ़िया तर्क है, तो क्या इतने महीनों तक सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन सिर्फ इसलिए नहीं किया गया क्योंकि राज्य में चुनाव चल रहे थे? अदालत ने इसे अपने निर्देशों की अवहेलना करने और बचने की एक कोशिश करार दिया।

🏥 12 अक्टूबर तक ताजा मेडिकल रिपोर्ट पेश करने का निर्देश

राज्य सरकार ने कोर्ट को यह जानकारी दी कि उनके पास पिछले जून महीने की मेडिकल रिपोर्ट मौजूद है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या तब से लेकर अब तक हाथी की कोई अन्य मेडिकल जांच नहीं कराई गई? अदालत ने राज्य सरकार को कड़ा निर्देश देते हुए कहा कि उन्हें 9 जून के आदेश का पूरी तरह से पालन करना होगा और हाथी की उचित देखभाल सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही, अधिकारियों को आगामी 12 अक्टूबर तक हाथी की ताजा मेडिकल जांच रिपोर्ट अदालत के रिकॉर्ड पर पेश करने का सख्त निर्देश दिया गया है।

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