सुकमा : नक्सलवाद के खिलाफ जंग में सुरक्षाबलों को सुकमा में अहम सफलता मिली है. शनिवार को फोर्स के जवानों ने जगरगुंडा नरसापुरम मार्ग पर नक्सलियों की आईईडी ब्लास्ट की प्लानिंग को फेल कर दिया. सीआरपीएफ 226 बटालियन के सतर्क जवानों ने माओवादियों द्वारा लगाए गए तीन शक्तिशाली (Naxal IED Defused) आईईडी को समय रहते खोजकर नष्ट कर दिया. यह सिर्फ एक सफल ऑपरेशन नहीं था, बल्कि उस अदृश्य खतरे के खिलाफ जीत थी, जो हर कदम पर जवानों का इंतजार करता है. इस पूरे ऑपरेशन में डॉगी नोरा ने अहम भूमिका निभाई और आईईडी को खोजने में फोर्स के जवानों की मदद की.

21 मार्च को इंस्पेक्टर गणपत राम के नेतृत्व में टीम नियमित RSO ड्यूटी पर निकली थी. जगरगुंडा कैंप से लगभग 3.7 किलोमीटर दक्षिण दिशा में बढ़ते हुए अचानक एक संदिग्ध तार दिखाई दिया. अनुभवी आंखों ने तुरंत पहचान लिया कि यह कोई सामान्य दृश्य नहीं है, बल्कि किसी बड़े खतरे का संकेत है.जवानों ने तुरंत इलाके को घेर लिया। हर कदम फूंक-फूंक कर रखा जा रहा था, क्योंकि यहां गलती की कोई गुंजाइश नहीं होती.

 Naxal IED Defused – अब असली परीक्षा शुरू हुई जमीन के नीचे छुपे खतरे को बाहर निकालने की. डीप सर्च मेटल डिटेक्टर (DSMD), बम निरोधक दस्ता (BDD) और डॉग स्क्वायड को सक्रिय किया गया। और यहीं नोरा ने अपनी भूमिका निभानी शुरू की. नोरा ने जैसे ही इलाके की जांच शुरू की, कुछ ही पलों में एक खास जगह पर रुककर संकेत दिए. उसके इस संकेत ने पूरी टीम को सतर्क कर दिया. इसके बाद बीडीडी कर्मी प्रदीप साहा और डीएसएमडी जवान रूपधर शोरी ने बेहद सावधानी से जांच शुरू की. उसके बाद जंगल से तीन आईईडी बरामद किए गए, जिसका वजन 1 किलो, 2 किलो और 4 किलो था. ये मेटल के कंटेनर में रखे गए थे.

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