रायसेन (मध्य प्रदेश): जिले की केंद्रीय सुरक्षा वाली जिला जेल से एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है। जेल के भीतर बंद एक विचाराधीन कैदी ने ड्यूटी पर तैनात जेल प्रहरी को गोली मार दी।

गोली लगने से जेल प्रहरी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें नाजुक हालत में प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत भोपाल रेफर किया गया है। घटना बुधवार सुबह की बताई जा रही है। घायल जेल प्रहरी का नाम दिग्विजय सिंह तोमर है, जबकि गोली चलाने वाले कैदी की पहचान नीलेश ठाकुर के रूप में हुई है।

🚪 जेल का गेट खुलवाने को लेकर हुआ था विवाद: कमर के निचले हिस्से में लगी गोली

वारदात का घटनाक्रम और विवाद की वजह:

  • भागने की नीयत से विवाद: प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कैदी नीलेश जेल का मुख्य गेट खुलवाकर बाहर भागने की फिराक में था।

  • विवाद और फायरिंग: गेट पर तैनात प्रहरी दिग्विजय सिंह तोमर ने जब उसे रोकने का प्रयास किया और गेट खोलने से मना किया, तो दोनों के बीच तीखी बहस हो गई। इसी दौरान कैदी ने अचानक कट्टा या पिस्तौल निकालकर प्रहरी पर फायर झोंक दिया।

  • परिसर में मचा हड़कंप: गोली प्रहरी की कमर के निचले हिस्से में लगी, जिसके बाद वे लहूलुहान होकर गिर पड़े। गोली की आवाज सुनते ही जेल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। अन्य सुरक्षाकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए घायल प्रहरी को फौरन जिला अस्पताल पहुंचाया।

🧺 रक्षाबंधन कार्यक्रम के लिए फलों की टोकरी लेकर पहुंचा था कैदी

कार्यक्रम की आड़ में रची गई साजिश:

  • आयोजन का माहौल: जिला जेल में बुधवार को स्कूली बच्चों के साथ रक्षाबंधन पर्व मनाने का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाना था।

  • टोकरी में हथियार लाने का संदेह: इसी कार्यक्रम की व्यवस्थाओं के तहत कैदी नीलेश निर्वेदी फलों की टोकरी लेकर जेल के मुख्य द्वार के पास पहुंचा था।

  • बरेली का रहने वाला है आरोपी: आरोपी कैदी नीलेश ठाकुर जिले के बरेली तहसील स्थित दिमाड़ा गांव का निवासी है।

⚖️ हत्या के प्रयास (धारा 307) के मामले में पहले से बंद था आरोपी

आपराधिक पृष्ठभूमि और कैदी का इतिहास:

  • संगीन धारा में बंद: आरोपी नीलेश भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत विचाराधीन कैदी (अंडर-ट्रायल) के रूप में जिला जेल में निरूद्ध है।

  • गंभीर लापरवाही के संकेत: एक संगीन अपराध के बंदी के पास जेल की चारदीवारी के भीतर घातक हथियार का पहुंच जाना जेल सुरक्षा तंत्र की सबसे बड़ी विफलता मानी जा रही है।

🔍 हाई-सिक्योरिटी जेल में कहां से आया हथियार? सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

प्रशासनिक चूक और जांच के मुख्य बिंदु:

  • हथियार की एंट्री पर रहस्य: जिला जेल जैसी त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था वाली संवेदनशील जगह पर कैदी के हाथों में बंदूक कैसे पहुंची, यह सबसे बड़ा जांच का विषय बन गया है।

  • जांच में भारी चूक: क्या गेट पर तलाशी के दौरान भारी लापरवाही बरती गई, या फिर कार्यक्रम के नाम पर बाहर से लाई गई फलों की टोकरी या किसी बाहरी व्यक्ति के माध्यम से हथियार भीतर पहुंचाया गया?

  • सुरक्षा व्यवस्था हाई अलर्ट: घटना के बाद जेल प्रशासन और स्थानीय पुलिस के आला अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। पूरे जेल परिसर में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है और सुरक्षा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

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