मनेन्द्रगढ़ : छत्तीसगढ़ के नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत द्वारा जगद्गुरु रामभद्राचार्य पर की गई टिप्पणी के बाद राजनीतिक और धार्मिक माहौल गरमा गया है। चिरमिरी के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में चल रही श्रीराम कथा के दौरान जगद्गुरु ने महंत के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई और उन्हें खुली चुनौती दी। रामभद्राचार्य ने कहा कि यदि (Political Clash in Chhattisgarh) नेता प्रतिपक्ष में नेतृत्व की शक्ति है, तो वे उनके ‘जगद्गुरुत्व’ का पूर्ण परीक्षण कर लें।

📜 जगद्गुरुत्व की परिभाषा और प्रमाण

व्यासपीठ से संबोधित करते हुए जगद्गुरु ने अपनी विद्वता की कसौटी पेश की। उन्होंने बताया कि जगद्गुरु बनने के लिए ब्रह्मचारी और विरक्त होना अनिवार्य है। साथ ही, उन्होंने ब्रह्मसूत्र, गीता और उपनिषदों पर भाष्य लिखने के अपने कार्य का उल्लेख किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिसे काशी विद्वत परिषद और सभी अखाड़ों का समर्थन प्राप्त हो, और कुंभ में जिसे प्रथम स्नान का अधिकार मिले, वही वास्तविक जगद्गुरु है। उन्होंने कहा, “मैं हर कसौटी पर खरा हूं, इसलिए मुझे किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं है।”

🚩 रामजन्मभूमि संघर्ष और राजनीतिक तंज

रामभद्राचार्य ने राम मंदिर आंदोलन के अपने संघर्षों को याद करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो भगवान श्रीराम से प्रेम करते हैं, उन्हें मेरा आशीर्वाद है, लेकिन सनातन के विरोधियों को यह सहन नहीं हो रहा है। उन्होंने निहत्थे रामभक्तों पर हुए अत्याचारों का जिक्र करते हुए विपक्ष से सवाल किया कि उन्होंने उस समय क्या किया था। उन्होंने देश के विभाजन और राजनीतिक परिस्थितियों पर भी कड़े शब्दों में टिप्पणी करते हुए कहा कि आजादी के बाद देश को गर्त में ले जाने का प्रयास किया गया।

🗣️ ‘नेता प्रतिपक्ष की भाषा असभ्य’

पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का उल्लेख करते हुए रामभद्राचार्य ने कहा कि वे तुलनात्मक रूप से बेहतर थे। उन्होंने चरणदास महंत को निशाने पर लेते हुए कहा कि उन्हें संतों के प्रति बोलने की (Political Clash in Chhattisgarh) तमीज नहीं है और उनकी भाषा बेहद ‘असभ्य’ है। जगद्गुरु ने कहा कि जो संतों का सम्मान नहीं कर सकते, उनसे सामान्य ज्ञान की उम्मीद करना व्यर्थ है।

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