2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई (UPI) भुगतान पर चार्ज लगाने की चर्चा के बाद से यह पूरे देश में बहस का मुद्दा बन गया है. हालांकि सरकार ने स्पष्ट कर दिया है यह चार्ज आम जनता की जेब से नहीं लिया जाएगा, लेकिन पेट्रोल पंपों पर 2000 रुपये से अधिक के ईंधन खरीद पर 5 रुपये का फिक्स चार्ज लगाने की घोषणा से पंप मालिकों की चिंता (Petrol Pump UPI Controversy) बढ़ गई है. पंजाब, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों के पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने कह दिया है कि वे 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई ट्रांजैक्शन स्वीकार नहीं करेंगे.

Petrol Pump UPI Controversy –  एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय बंसल की ओर से वित्त मंत्री को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि पेट्रोल पंप डीलर्स फिक्स मार्जिन पर काम करते हैं जो प्रति-लीटर के हिसाब से तय होता है. अक्टूबर 2017 के बाद से कमीशन में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जबकि बिजली, मजदूरी और अन्य रेगुलेटरी लागतें लगातार बढ़ रही हैं. डीलर्स का कहना है कि ट्रांजैक्शन की वैल्यू बढ़ने से उनकी कमाई नहीं बढ़ती, इसलिए 2,000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर 5 रुपये का फिक्स्ड चार्ज उनके मुनाफे पर सीधा असर डालेगा.

 नफा-नुकसान का पूरा गणित

इस पूरे विवाद के बीच यदि गणित को समझें तो पेट्रोल पंपों को प्रति लीटर के हिसाब से कमीशन मिलता है. उदाहरण के लिए, यदि कोई ग्राहक 3000 रुपये का पेट्रोल डलवाता है और डीलर को प्रति लीटर औसत कमीशन मिलता है, तो 5 रुपये का एमडीआर (MDR) चार्ज कटने के बाद भी डीलर के पास पर्याप्त मुनाफा बचता है. हालांकि, डीलर्स का तर्क है कि रोजाना के हजारों ट्रांजैक्शंस को देखते हुए यह अतिरिक्त बोझ उनके मार्जिन को प्रभावित करता है, जबकि एनपीसीआई (NPCI) के नियमों के तहत यह चार्ज कस्टमर से नहीं वसूला जा सकता.

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