कांकेर (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के पखांजूर क्षेत्र स्थित बेचाघाट कोटरी नदी में शनिवार शाम एक बड़ा जल हादसा होते-होते बाल-बाल टल गया। नदी पार कर रही ग्रामीणों से खचाखच भरी एक नाव पानी के भीतर अचानक बने रेत के टीले से टकराकर अनियंत्रित होकर पलट गई। नाव में कुल 12 ग्रामीणों के साथ दो मोटरसाइकिलें और लगभग एक महीने का किराना राशन-सामान भी लदा हुआ था।

🌊 पानी के भीतर रेत के टीले से टकराई नाव, अनियंत्रित होकर एक ओर झुकी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार शाम 12 ग्रामीण एक नाव के जरिए बेचाघाट कोटरी नदी को पार कर रहे थे।

इसी दौरान जलस्तर के भीतर छिपे हुए रेत के टीले से नाव का निचला हिस्सा टकरा गया, जिससे नाव अचानक एक तरफ झुक गई। नाव को अचानक झुकता देख उसमें सवार ग्रामीण घबरा गए और स्वयं को बचाने के लिए नाव से उतरने की कोशिश करने लगे। इसी बीच नाव में तेजी से पानी भरने लगा और देखते ही देखते नाव जलमग्न होकर पलट गई।

🛟 नाविक और स्थानीय ग्रामीणों ने चलाया तत्काल रेस्क्यू, सभी 12 लोग सुरक्षित निकाले गए

दुर्घटना के तुरंत बाद मौके पर उपस्थित नाविक और आसपास के ग्रामीणों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए तत्काल बचाव कार्य (Rescue Operation) प्रारंभ किया।

नाव में सवार सभी 12 लोगों को एक-एक कर सुरक्षित बाहर निकालकर नदी के किनारे पहुँचाया गया। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, किंतु ग्रामीणों का राशन, किराना सामान, मोबाइल एवं अन्य मूल्यवान सामग्रियां नदी के तेज बहाव में बह गईं। वहीं, पानी में डूबी दोनों मोटरसाइकिलों को काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाल लिया गया।

⚠️ नदी में सुरक्षा इंतजामों की मांग, ग्रामीणों में व्याप्त हुआ भारी दहशत का माहौल

इस भयानक घटना के बाद से क्षेत्रीय ग्रामीणों में भारी भय और आक्रोश का माहौल है।

ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि नदी के भीतर रेत के टीले निर्मित हो जाने के कारण नावों के नियमित आवागमन में खतरा अत्यधिक बढ़ गया है। उन्होंने जिला प्रशासन से नदी में आवागमन हेतु सुरक्षित परिवहन व्यवस्था और नाव संचालन के दौरान पर्याप्त सुरक्षा उपकरण (लाइफ जैकेट आदि) उपलब्ध कराने की गुहार लगाई है।

🗣️ “अफसर आए और सुरक्षित नाव ले गए”: कंदाडी ग्राम पंचायत सरपंच मैनी कचलामी का बड़ा आरोप

ग्राम पंचायत कंदाडी की सरपंच मैनी कचलामी ने प्रशासनिक उपेक्षा पर कड़ा प्रहार करते हुए व्यवस्थाओं की पोल खोली है।

“जिस दिन कांकेर जिला कलेक्टर स्वयं नदी पार कर कंदाडी गांव पहुंचे थे, उसी दिन विशेष रूप से कांकेर से एक सुरक्षित नाव लाई गई थी। किंतु अगले ही दिन आला अधिकारी आए और उस सुरक्षित नाव को अपने साथ वापस लेकर चले गए। यदि गांव में सुरक्षित नाव की स्थाई व्यवस्था रहती, तो ऐसे खतरनाक हादसों का जोखिम कम किया जा सकता था।” — मैनी कचलामी, सरपंच, ग्राम पंचायत कंदाडी

फिलहाल इस हादसे में सभी 12 ग्रामीण सकुशल हैं, किंतु इस घटना ने दुर्गम अंचलों में नदी पार करने वाले ग्रामीणों की जीवन सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से अविलंब स्थाई व सुरक्षित बोट व्यवस्था की मांग की है।

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