मुंबई में हजारों लोगों तक रोजाना घर का खाना पहुंचाने वाली मुंबई डब्बेवाला एसोसिएशन ने 30 मार्च से 4 अप्रैल तक छह दिन की छुट्टी का ऐलान किया है. ग्रामदेवता के उत्सव के चलते डब्बेवाले इस दौरान अपने गांव जाएंगे. हर साल की तरह इस बार भी पुणे जिले के मुलशी, मावल, आंबेगांव, जुन्नर, खेड, और अहिल्यानगर के अकोला और संगमनेर जैसे क्षेत्रों से जुड़े डब्बेवाले जत्रा, कुलदेवता की पूजा, पारंपरिक धार्मिक कार्यक्रम और खेती के कामों के लिए गांव लौट रहे हैं.
इस फैसले से मुंबई और उपनगरों में काम करने वाले हजारों लोग प्रभावित होंगे, जो रोजाना अपने लंच के लिए डब्बेवालों पर निर्भर रहते हैं. मुंबई के सेंट्रल और वेस्टर्न लाइन दोनों पर रोजाना लगभग एक लाख टिफिन दोपहर के लंच के लिए सही समय पर पहुचाते हैं. एलपीजी की कमी के चलते मेस और घरों से टिफिन आने कम हो गए हैं जिससे डब्बेवालों का बिजनेस 10 से 30 फीसदी कम हुआ हैं.
4 अप्रैल तक टिफिन सर्विस बंद
मुंबई टिफिन बॉक्स सप्लायर के सचिव किरन गवांदे ने बताया की हर साल डब्बेवाले इस समय अपने गांव जाते हैं. 6 दिन की छुट्टी में महावीर जयंती, हनुमान जयंती, गुड फ्राइडे होने के कारण 4 दिन ही छुट्टी पर रहेंगे. एसोसिएशन ने इस असुविधा के लिए खेद जताया है और ग्राहकों से अपील की है कि छुट्टी के दौरान डब्बेवालों का वेतन न काटा जाए. छह दिन की इस छुट्टी के बाद 5 अप्रैल से डब्बेवाले फिर से अपनी नियमित सेवा शुरू करेंगे.
गैस संकट का असर
हालांकि, सिर्फ कुछ शहरों में ही नहीं, देश के ज्यादातर राज्यों में लोग गैस के संकट का सामाना कर रहे हैं. वहीं दूसरे राज्यों में काम करने वाले मजदूर वापस अपने गांव को लौटने लगे हैं. लोगों ने कहा कि अगर यही हालात रहे तो स्थित बेहद गंभीर हो जाएगी.
