देवघर (झारखंड): सरकारी प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की पठन क्षमता (Reading Skill) को निखारने और उनके भीतर आत्मविश्वास के साथ अभिव्यक्ति की कला विकसित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार की पहल पर ‘मेरी शब्द, मेरी कहानी’ अभियान की शुरुआत की गई है।
इस विशेष अभियान के अंतर्गत बच्चों को नियमित रूप से पाठ्यपुस्तकें पढ़ने, नए व कठिन शब्दों के अर्थ समझने और उनका स्पष्ट व सटीक उच्चारण करने का सघन अभ्यास कराया जा रहा है।
📋 जिला प्रशासन ने प्रधानाध्यापकों को जारी किए सख्त दिशा-निर्देश
प्रशासनिक रूपरेखा और क्रियान्वयन:
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दिशा-निर्देश जारी: जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग द्वारा जिले के सभी सरकारी प्राथमिक व मध्य विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को अभियान के सफल संचालन हेतु विस्तृत गाइडलाइन भेजी गई है।
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शिक्षकों की निगरानी: कक्षाओं में शिक्षकों की सीधी देखरेख में प्रतिदिन बच्चों से किताबें पढ़वाने पर विशेष बल दिया गया है, ताकि शुरुआती प्राथमिक स्तर से ही बच्चों की भाषा और रीडिंग स्किल की नींव मजबूत हो सके।
⏰ स्कूलों में रोजाना 1 घंटे विशेष पठन अभ्यास, मौके पर सुधारा जा रहा उच्चारण
कक्षाओं में पठन-पाठन की प्रक्रिया:
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दैनिक अभ्यास सत्र: विद्यालय की वरिष्ठ शिक्षिका प्रतिमा के अनुसार, अभियान के तहत प्रतिदिन लगभग एक घंटा बच्चों को पुस्तकें देकर सामूहिक व व्यक्तिगत रूप से पढ़ने का अभ्यास कराया जाता है।
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तत्काल सुधार: पठन के दौरान जहां भी बच्चे किसी कठिन शब्द के उच्चारण या अर्थ में अटकते हैं, शिक्षक तत्काल उसे सुधारते हुए सही उच्चारण और पढ़ने का सही तरीका सिखाते हैं।
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आत्मविश्वास में वृद्धि: नियमित अभ्यास से बच्चों के मन से शब्दों का डर समाप्त हो रहा है और उनमें धाराप्रवाह पढ़ने की क्षमता विकसित हो रही है।
🏡 ग्रामीण परिवेश और अशिक्षित अभिभावकों की चुनौती का समाधान
अभियान की आवश्यकता और पृष्ठभूमि:
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घरेलू माहौल का अभाव: सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के कई अभिभावक अशिक्षित या कम पढ़े-लिखे हैं, जिसके कारण बच्चों को घर पर अध्ययन और भाषा अभ्यास का अनुकूल शैक्षणिक माहौल नहीं मिल पाता।
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स्कूल में भरपाई: घर के इस अभाव को दूर करने और ग्रामीण बच्चों को बराबरी के अवसर देने के लिए स्कूल में ही यह सुधारात्मक वातावरण तैयार किया जा रहा है।
🎯 ग्रामीण बच्चों की हिचक दूर करने पर विशेष फोकस: DSE मधुकर कुमार
शिक्षा विभाग का दृष्टिकोण और निगरानी:
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अधिकारियों की निगरानी: जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) और जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) द्वारा सभी प्रखंडों के स्कूलों से अभियान की नियमित प्रगति रिपोर्ट ली जा रही है।
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DSE मधुकर कुमार का बयान: जिला शिक्षा अधीक्षक ने बताया कि इस अभियान का मुख्य फोकस ग्रामीण और सुदूरवर्ती इलाकों के बच्चों पर है, जो अक्सर समूह के सामने बोलने या मंच पर अपनी बात रखने में संकोच व झिझक महसूस करते हैं।
🌟 केवल किताबी ज्ञान नहीं, संपूर्ण व्यक्तित्व विकास की तैयारी
भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयारी:
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अभिव्यक्ति क्षमता का विकास: ‘मेरी शब्द, मेरी कहानी’ अभियान का दायरा केवल किताबें पढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए बच्चों में स्पष्ट संवाद, तार्किक सोच और सार्वजनिक मंचों पर बेझिझक बोलने का आत्मविश्वास तैयार किया जा रहा है।
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सर्वांगीण विकास: आधुनिक समय की प्रतियोगी परीक्षाओं और साक्षात्कारों में सफलता के लिए किताबी ज्ञान के साथ-साथ प्रभावी संवाद और आत्मविश्वास अत्यंत आवश्यक है, जिसकी मजबूत नींव यह अभियान रख रहा है।


