गणेश उत्सव के दौरान भक्त पूरे विधि-विधान और श्रद्धा भाव से भगवान गणेश की स्थापना और पूजा-अर्चना करते हैं. इसके बाद अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा का विसर्जन किया जाता है. लेकिन कई बार विसर्जन से पहले किसी कारणवश गणपति की प्रतिमा खंडित जाती है, जिसे लेकर भक्तों के मन में तरह-तरह के सवाल उठने लगते हैं कि क्या खंडित प्रतिमा की पूजा जारी रखनी चाहिए या तुरंत विसर्जन कर देना चाहिए. शास्त्रों के अनुसार, ऐसी स्थिति में घबराने (Khandit Murti Niyam) की जरूरत नहीं होती, बल्कि कुछ विशेष नियमों का पालन करना चाहिए.

 भगवान से मांगें क्षमा और सम्मानपूर्वक करें विसर्जन

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि स्थापना के बाद विसर्जन से पहले बप्पा की प्रतिमा खंडित हो जाए, तो सबसे पहले भक्त को भगवान गणेश के समक्ष हाथ जोड़कर अनजाने में हुई भूल या दुर्घटना के लिए क्षमा मांगनी चाहिए. इसके बाद खंडित प्रतिमा को अत्यंत सम्मान के साथ पूजा स्थान से हटाकर विसर्जित कर देना उचित माना जाता है. इस (Khandit Murti Niyam) का विशेष ध्यान रखें कि खंडित मूर्ति को कभी भी कूड़ेदान में या किसी अनादर वाली जगह पर न फेंके, क्योंकि इससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंच सकती है.

  2026 में कब है अनंत चतुर्दशी और गणपति विसर्जन?

हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में गणपति विसर्जन का पावन पर्व 25 सितंबर, शुक्रवार यानी अनंत चतुर्दशी के दिन मनाया जाएगा. इस दिन गणेश उत्सव का समापन होता है और बप्पा को विदाई दी जाती है. शास्त्रों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रतिमा का खंडित होना हमेशा किसी अशुभ संकेत का प्रतीक नहीं होता है, बल्कि यह सामान्य रूप से किसी दुर्घटना या गलती के कारण भी हो सकता है, इसलिए भक्तों को इसमें परेशान होने के बजाय शांत मन से नियमपूर्वक विसर्जन करना चाहिए.

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