रांची : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भले ही देश को मार्च महीने में ही नक्सल मुक्त (Naxal Free) करने की रणनीतिक घोषणा कर दी थी, लेकिन अब जमीनी स्तर पर झारखंड पूरी तरह से नक्सलवाद के दंश से मुक्त होने की कगार पर जा पहुंचा है। एशिया के सबसे घने जंगलों में शुमार ‘सारंडा’ (Saranda Forest) में सालों से विचरण (biggest surrender in history) करने वाले और दहशत का पर्याय बने कई खूंखार नक्सलियों ने एक साथ सामूहिक रूप से जंगल छोड़ दिया है और देश की मुख्यधारा में लौटने के लिए सुरक्षा बलों के सामने अपने घुटने टेक दिए हैं।
🪖 खुफिया एजेंसियों की कूटनीति के आगे ढहा संगठन
गुरुवार का दिन झारखंड के नक्सल विरोधी अभियान और इतिहास में सबसे बड़े मील का पत्थर के रूप में दर्ज होने जा रहा है। राज्य के गठन के बाद यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में हार्डकोर नक्सली एक साथ विधिवत रूप से आत्मसमर्पण करने जा रहे हैं। सुरक्षा मुख्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक, सारंडा के घने और बीहड़ जंगलों में सक्रिय इन दो दर्जन से अधिक नक्सलियों ने न सिर्फ आत्मसमर्पण किया है, बल्कि अपने साथ एलएमजी (LMG) और अत्याधुनिक राइफलों जैसे एक दर्जन से ज्यादा घातक हथियार और भारी मात्रा में गोला-बारूद भी पुलिस के हवाले कर दिया है।
🔥 सारंडा में अब आधी बची नक्सलियों की संख्या
अंदरूनी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले ये सभी नक्सली देश के सबसे शीर्ष नक्सल कमांडर और एक करोड़ रुपये के इनामी ‘मिसिर बेसरा’ के व्यक्तिगत दस्ते (Squad) के सक्रिय सदस्य बताए जा रहे हैं। गौरतलब है कि मिसिर बेसरा ही वर्तमान में सारंडा और कोल्हान के जंगलों में नक्सल संगठन भाकपा (माओवादी) को लीड कर रहा है। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में लड़ाकू और विश्वासपात्र नक्सलियों के जंगल छोड़ देने से (biggest surrender in history) नक्सली संगठन के केंद्रीय नेतृत्व को ऐसा झटका लगा है जिससे उबरना नामुमकिन माना जा रहा है।
