भारत सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आह्वान पर हुए बड़े प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के मामले में संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) द्वारा की गई टिप्पणियों पर बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए करारा पलटवार किया है। नई दिल्ली ने OHCHR की चिंता को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे देश के आंतरिक मामलों में एक अनुचित और अनावश्यक हस्तक्षेप करार दिया है। भारत ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि देश में शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने का अधिकार भारत के संविधान के तहत पूरी तरह सुरक्षित है और इसकी रक्षा के लिए यहाँ मजबूत संस्थागत व्यवस्था मौजूद है।
🏛️ ‘भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र’ : जिनेवा स्थित भारतीय मिशन का बयान
जेनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने सोशल मीडिया पर अपना आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहाँ देश का संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होने के अधिकार की पूरी गारंटी देता है।
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बयान में कहा गया कि हमारी मजबूत संस्थाएं, स्वतंत्र न्यायपालिका और स्वतंत्र मीडिया इस अधिकार की पूरी सुरक्षा करते हैं।
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हर लोकतांत्रिक देश की तरह भारतीय नागरिक भी सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने के लिए जरूरी उचित कानूनी प्रतिबंधों के दायरे में रहकर ही अपने इन अधिकारों का इस्तेमाल करते हैं।
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देश के अधिकारी पूरी तरह कानून के अनुसार काम कर रहे हैं और किसी भी प्रकार की शिकायत के समाधान के लिए हमारी स्वतंत्र अदालतें हर नागरिक के लिए हमेशा उपलब्ध हैं।
🚫 OHCHR की चिंताएं बेबुनियाद और अनावश्यक दखल
भारतीय दूतावास ने आगे तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की चिंताएं पूरी तरह से बेबुनियाद हैं और यह भारत के अंदरूनी मामलों में अनावश्यक दखलंदाजी है। भारत ने स्पष्ट किया कि निष्पक्षता और बिना किसी भेदभाव के काम करने के अपने मूल दायित्व को ध्यान में रखते हुए, OHCHR के लिए यह ज्यादा बेहतर होता कि वह दुनिया के अन्य हिस्सों में हो रहे बड़े पैमाने के विरोध-प्रदर्शनों और मानवाधिकार मामलों पर भी उतना ही ध्यान केंद्रित करता।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रवक्ता थामीन अल-खीतान ने दिल्ली में हुई सामूहिक गिरफ्तारियों पर चिंता जताई थी और प्रदर्शनकारियों की तत्काल रिहाई की मांग की थी। दूसरी ओर, यह पूरा विवाद मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किए जा रहे प्रदर्शनों के कारण उपजा है।


