पश्चिम एशिया संकट पर बुधवार को मंत्री समूह की संसद भवन में बैठक हुई. ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर के कमरे में हुई इस मीटिंग में खाद्य और उपभोक्ता, नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रल्हाद जोशी, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी भी मौजूद रहे, जिसमें हालात की समीक्षा की गई. बैठक में पीएनजी कनेक्शन को बढ़ावा देने और LPG सिलेंडर पर निर्भरता कम करने पर जोर दिया गया.

मंत्री समूह की बैठक में ईवी (Electric Vehicles) की खरीद और इस्तेमाल को बढ़ावा देने, इंडक्शन हीटर के प्रोडक्शन और इस्तेमाल को बढ़ाने के साथ ही इंडक्शन हीटर में इस्तेमाल होने वाले बर्तनों की कीमत को कम करने को लेकर भी चर्चा हुई. साथ ही बिजली के इस्तेमाल को लेकर लोगों को प्रोत्साहित करने के उपायों पर भी चर्चा हुई. मसलन कि क्या ऐसा हो सकता है कि दिन में बिजली की दर को रात के मुकाबले कम किया जा सकता है. ताकि जनता दिन में बिजली का इस्तेमाल ज्यादा करे.

अगली बैठक में प्रेजेंटेशन देंगे सचिव

बैठक में तय हुआ कि इन सभी मुद्दों पर संबंधित सचिव अगली बैठक में प्रेजेंटेशन देंगे. उधर, सरकारी तेल कंपनियों ने बुधवार को कहा कि देश में पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कोई कमी नहीं है. लोग अफवाहों पर यकीन ना करें. घबराहट में ईंधन खरीदने से बचें. इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने कहा, उसके पेट्रोल पंप पर्याप्त ईंधन से भरे हैं. अफवाहें चिंता पैदा कर सकती हैं. सामान्य आपूर्ति व्यवस्था को बाधित कर सकती हैं.

ईंधन की कमी खबरें निराधार

भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड ने कुछ क्षेत्रों में ईंधन की कमी की खबरों को निराधार बताया और कहा कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है. भारत पेट्रोल एवं डीजल का शुद्ध निर्यातक है. उसके पास कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और विमानन ईंधन का पर्याप्त भंडार है. कंपनी पूरी तरह संचालित है. फ्यूल सप्लाई करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.

युद्ध का सबसे ज्यादा असर एलपीजी पर

बता दें कि युद्ध की वजह से कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई. हालांकि भारत पश्चिम अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और अमेरिका से पर्याप्त कच्चा तेल हासिल करने में सफल रहा है. युद्ध का सबसे ज्यादा असर एलपीजी पर पड़ा है क्योंकि देश अपनी कुल मांग का करीब 60 फीसदी आयात से पूरा करता है. इसका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है.

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