लखनऊ/नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के टोल प्लाजा पर धोखाधड़ी से टोल वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में व्यापक कार्रवाई शुरू की है। ED के लखनऊ जोनल कार्यालय के नेतृत्व में यह छापेमारी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू, मध्य प्रदेश, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और (NHAI toll plaza scam) पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित संदिग्धों के ठिकानों पर की जा रही है।

 फर्जी सॉफ्टवेयर और अनधिकृत रसीदों का खेल 

जांच में सामने आया है कि आरोपियों द्वारा अनधिकृत (Unauthorized) सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर फर्जी टोल रसीदें जारी की जा रही थीं। वाहनों से वसूला गया राजस्व NHAI के आधिकारिक अकाउंटिंग सिस्टम में दर्ज न करके सीधे निजी खातों में डायवर्ट किया जा रहा था, जिससे सरकारी खजाने को भारी वित्तीय क्षति हुई। फॉरेंसिक जांच और NHAI के आंतरिक रिकॉर्ड्स में भी ऐसे अवैध सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल की पुष्टि हो चुकी है।

फर्जी FASTag से निकल रहे थे वाहन

टोल संचालकों, आईटी कर्मियों और मुख्य बिचौलियों के बीच घोटाले की रकम के बंटवारे के पुख्ता इनपुट मिले हैं। छापेमारी के दौरान ED की टीमें डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक खाते और बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज खंगाल रही हैं। जांच में यह भी उजागर हुआ है कि फर्जी FASTag के जरिए ओवरलोडेड और कमर्शियल वाहनों को गैरकानूनी तरीके से टोल प्लाजा से पास कराया जा रहा था। इस सिंडिकेट पर UP STF और केंद्रीय एजेंसियां पैनी नजर बनाए हुए हैं।

मास्टरमाइंड आलोक सिंह गिरफ्तार 

वाराणसी से टोल घोटाले के मुख्य सरगना आलोक सिंह को पूर्व में गिरफ्तार किया जा चुका है। उस पर हरहुआ इलाके में बैठकर इस पूरे अवैध नेटवर्क को संचालित करने का आरोप है। वाराणसी के लाला नगर टोल प्लाजा पर ₹62.87 करोड़ की स्टांप ड्यूटी चोरी मामले में भी गहन तफ्तीश चल रही है। देशभर के 200 से अधिक टोल प्लाजा जांच (NHAI toll plaza scam) एजेंसियों के रडार पर हैं, जिनमें से लगभग 100 टोल प्लाजा अकेले उत्तर प्रदेश में स्थित हैं।

 

 

 

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