पलामू : झारखंड के पलामू जिले के युवाओं का झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं से भरोसा कम होता जा रहा है। लगातार हो रही अनिश्चितताओं और विवादों के कारण पलामू के अभ्यर्थी अब JPSC की तैयारी छोड़कर बड़े पैमाने पर बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुट रहे हैं। साल 2023 के बाद से पलामू के 12 से अधिक युवाओं ने बीपीएससी की परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की है, जिसके चलते स्थानीय (disillusionment with JPSC) कोचिंग संस्थानों और छात्रों के बीच बीपीएससी का क्रेज तेजी से बढ़ा है।

 मगही-भोजपुरी भाषा विवाद और सांस्कृतिक जुड़ाव बना बड़ा कारण

पलामू प्रमंडल का क्षेत्र भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से बिहार के औरंगाबाद और गया जिलों से सटा हुआ है, जिससे यहां बोलचाल और पठन-पाठन की संस्कृति बिहार से काफी मिलती-जुलती है। पलामू के इलाके में बड़े पैमाने पर भोजपुरी और मगही भाषा बोली जाती है। झारखंड सरकार द्वारा राज्य की प्रतियोगी परीक्षाओं की क्षेत्रीय भाषा सूची से मगही और भोजपुरी को हटाए जाने के बाद से छात्रों में भारी असंतोष है।

2023 के बाद पलामू के 12 से अधिक युवाओं को BPSC में मिली सफलता

वर्ष 2023 के बाद से पलामू के लक्की सिंह, रिया वर्मा, प्राची, काजल कुमारी, अश्विनी भारती (disillusionment with JPSC) सहित 12 से अधिक अभ्यर्थियों ने बीपीएससी की विभिन्न परीक्षाओं में उत्कृष्ट रैंक हासिल कर सफलता पाई है। स्थानीय अभ्यर्थियों का मानना है कि जितनी संख्या में पलामू के युवाओं का चयन बिहार की परीक्षाओं में हो रहा है, उस अनुपात में झारखंड लोक सेवा आयोग में स्थानीय युवाओं को अवसर और परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं।

 

 

 

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