नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा तैयार किए गए दिल्ली मास्टर प्लान-2047 के जरिए राष्ट्रीय राजधानी का स्वरूप पहले से कहीं अधिक ऊंचा, कॉम्पैक्ट और आधुनिक बनने जा रहा है।

इस महत्वाकांक्षी योजना में दिल्ली में 100 मंजिल तक की गगनचुंबी इमारतों के निर्माण का रास्ता खोलने का प्रावधान किया गया है। योजना का मुख्य उद्देश्य शहर के अनियोजित फैलाव को नियंत्रित करना, सीमित जमीन का वैज्ञानिक उपयोग सुनिश्चित करना और बढ़ती आबादी को विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा व आवास उपलब्ध कराना है।

🏠 झुग्गी-बस्तियों के लिए इन-सीटू पुनर्वास योजना: उसी स्थान पर मिलेंगे आधुनिक फ्लैट

झुग्गीवासियों के पुनर्वास और विकास मॉडल की मुख्य बातें:

  • उसी स्थान पर पुनर्वास: डीडीए (DDA) ने ‘इन-सीटू पुनर्वास’ नीति को प्राथमिकता दी है, जिसके तहत झुग्गीवासियों को उसी जगह या नजदीकी क्षेत्र में पक्के मकान दिए जाएंगे।

  • 500 FAR की अनुमति: न्यूनतम 2,000 वर्ग मीटर के भूखंड पर 500 तक फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) के साथ बहुमंजिला आवासीय परिसर विकसित किए जा सकेंगे।

  • क्लस्टर विकास: 3 किलोमीटर के दायरे में आने वाली छोटी बस्तियों को जोड़कर बड़ी परियोजनाएं बनेंगी, जिसमें बचे भूखंड का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों और परियोजना की लागत निकालने के लिए होगा।

🏗️ 100 मंजिल तक ऊंची इमारतें: मास ट्रांजिट कॉरिडोर के पास बदलेगी स्काईलाइन

ऊंची इमारतों और शहरी विकास की दिशा:

  • ट्रांजिट हब के पास निर्माण: मेट्रो, नमो भारत (RRTS) और प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों के आसपास वर्टिकल ग्रोथ (ऊंची इमारतों) को प्रोत्साहित किया जाएगा।

  • जमीन की बचत: कम भूमि पर अधिक परिवारों के आवास और आधुनिक दफ्तर तैयार करने के लिए ऊंचाई के नियमों में अभूतपूर्व ढील दी गई है।

📏 इमारतों की ऊंचाई की पाबंदियों में राहत, FAR नियमों से होगा निर्माण

ऊंचाई और निर्माण के वैधानिक नियम:

  • कोई निश्चित ऊंचाई सीमा नहीं: ग्रुप हाउसिंग, मिक्स्ड लैंड यूज, वेयरहाउसिंग और री-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स में ऊंचाई की पूर्व निर्धारित सीमा हटाई गई है।

  • डीडीए और वैधानिक मंजूरी: भवन निर्माण के लिए संबंधित नागरिक निकायों की अनुमति अनिवार्य होगी और कुल निर्माण डीडीए के निर्धारित FAR पर आधारित रहेगा।

🛏️ प्रवासियों के लिए सस्ते किराए के मकान और हॉस्टल की व्यवस्था

कामगारों और छात्रों के लिए प्रावधान:

  • सस्ते किराए के आवास: रोजगार और शिक्षा के लिए दिल्ली आने वाले प्रवासियों व श्रमिकों के लिए अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग और वर्किंग हॉस्टल बनाए जाएंगे।

  • आपदा प्रबंधन: अनियोजित क्षेत्रों के खाली भूखंडों व सामुदायिक केंद्रों को आपातकालीन राहत कार्यों के अनुकूल तैयार किया जाएगा।

💼 घर के नजदीक को-वर्किंग स्पेस: कम होगा सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव

कार्यस्थलों का विकेंद्रीकरण:

  • साझा कार्यस्थल: रिहायशी कॉलोनियों के पास को-वर्किंग स्पेसेज को बढ़ावा मिलेगा, जिससे लोगों को रोज लंबी दूरी तय करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

  • ट्रैफिक में कमी: इससे मुख्य सड़कों और सार्वजनिक परिवहन पर भीड़ घटेगी और प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी।

🏪 30 मीटर से चौड़ी सड़कों पर व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति

व्यापारिक रियायतें और शर्तें:

  • ग्राउंड फ्लोर पर कारोबार: 30 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों पर स्थित मकानों के ग्राउंड फ्लोर या स्टिल्ट पार्किंग फ्लोर पर व्यावसायिक गतिविधियों की छूट होगी।

  • प्रदूषणकारी उद्योगों पर रोक: किसी भी प्रकार के ज्वलनशील, रासायनिक, खतरनाक या प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को रिहायशी इलाकों में अनुमति नहीं मिलेगी।

🛡️ भूकंप से सुरक्षा: जोन-4 के अनुसार अनिवार्य स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट

सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के कड़े नियम:

  • स्ट्रक्चरल ऑडिट: दिल्ली के सीस्मोलॉजिकल जोन-4 में होने के कारण सभी ऊंची इमारतों की मजबूती और भूकंपरोधी क्षमता का नियमित तकनीकी ऑडिट अनिवार्य होगा।

  • जोखिम क्षेत्रों पर ध्यान: घनी आबादी और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा मानकों की प्राथमिकता के आधार पर जांच की जाएगी।

⚡ सड़कों से हटेगा तारों का मकड़जाल, अंडरग्राउंड होगी बिजली व्यवस्था

शहरी सौंदर्य और जनसुरक्षा:

  • खुले तारों से मुक्ति: पुरानी दिल्ली, शहरी गांवों और संकरे बाजारों में लटकते बिजली के तारों को अंडरग्राउंड या सुरक्षित केबलिंग में बदला जाएगा।

  • दुर्घटनाओं पर रोक: पावर डिस्कॉम और स्थानीय निकाय संयुक्त रूप से कार्य कर खुले तारों से होने वाले शॉर्ट सर्किट और हादसों पर पूरी तरह लगाम लगाएंगे।

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