गोहाना (हरियाणा): शहर की नगर परिषद की वाइस चेयरपर्सन राजबाला मलिक और पूर्व चेयरमैन आजाद सिंह मलिक के नवजात पोते की बुधवार तड़के उपचार के दौरान असमय मौत हो गई।

महज 4 दिन पहले जन्मे इस मासूम का अभी नामकरण संस्कार भी नहीं हो पाया था। शिशु जन्मजात विकार (Imperforate Anus / प्राकृतिक शौच द्वार न होना) से पीड़ित था। इस दुखद घटना के बाद शोकाकुल परिवार ने डिलीवरी कराने वाली निजी अस्पताल की चिकित्सक पर लापरवाही बरतने और समय रहते स्थिति स्पष्ट न करने का गंभीर आरोप लगाया है, जबकि चिकित्सक ने इन आरोपों से साफ इनकार किया है।

👶 15 अगस्त को हुआ था जन्म, 16 अगस्त को अस्पताल ने किया था डिस्चार्ज

शिशु के जन्म और उपचार से जुड़ा घटनाक्रम:

  • अस्पताल में भर्ती: कमल मलिक की पत्नी रीना मलिक (जिनकी पहले से 6 वर्ष की एक पुत्री है) को प्रसव पीड़ा होने पर 15 अगस्त की सुबह बरोदा रोड स्थित अभिषेक मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

  • नॉर्मल डिलीवरी: शाम 7:55 बजे रीना मलिक ने सामान्य प्रसव (Normal Delivery) से एक स्वस्थ दिखने वाले बेटे को जन्म दिया।

  • डिस्चार्ज प्रक्रिया: अस्पताल प्रबंधन ने 16 अगस्त की दोपहर 2:00 बजे जच्चा और बच्चा दोनों को स्वस्थ बताते हुए अस्पताल से छुट्टी (Discharge) दे दी।

⚠️ स्तनपान के बाद भी नहीं हुआ शौच, दिल्ली ले जाते समय मासूम ने तोड़ा दम

घर पहुंचने के बाद शिशु की स्वास्थ्य स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई:

  • लक्षण और परेशानी: परिजनों के अनुसार बच्चे को मां का दूध और कृत्रिम दूध पिलाया गया, लेकिन उसने एक बार भी शौच नहीं किया और धीरे-धीरे उसका शरीर पीला पड़ने लगा।

  • पुनः अस्पताल आगमन: मंगलवार को जब परिजन बच्चे को दोबारा उसी अस्पताल ले गए, तब जांच के बाद परिजनों को जानकारी दी गई कि शिशु का प्राकृतिक शौच द्वार नहीं है।

  • रेफरल और दुखद अंत: गंभीर स्थिति को देखते हुए शिशु को तुरंत सोनीपत और फिर उच्च स्तरीय चिकित्सा के लिए दिल्ली ले जाया जा रहा था, परंतु रास्ते में ही तड़के 1:00 बजे मासूम ने दम तोड़ दिया।

👩‍⚕️ प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सलोनी गुप्ता की सफाई: ‘देखते ही सर्जरी की सलाह दी थी’

परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों पर अस्पताल की वरिष्ठ प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सलोनी गुप्ता ने अपना पक्ष रखा:

  • चिकित्सकीय दृष्टिकोण: डॉ. सलोनी गुप्ता का कहना है कि मेडिकल साइंस के अनुसार नवजात शिशु जन्म के 48 घंटे के भीतर पहली बार शौच कर सकता है।

  • विशेषज्ञ सर्जरी की जरूरत: उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में विकार सामने आते ही परिजनों को तुरंत अवगत करा दिया गया था कि बच्चे का प्राकृतिक शौच द्वार नहीं है और उसे तत्काल पीडियाट्रिक सर्जन (बाल रोग सर्जन) के पास ले जाएं, ताकि सर्जरी के जरिए शौच द्वार बनाया जा सके।

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