संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में सोमवार को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक पेश होना था.हालांकि यह विधेयक विपक्ष के विरोध के कारण पेश नहीं हो पाया है. विपक्षी पार्टियां (CAPF bill 2026) खासतौर पर तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि बिल की कॉपी सांसदों को कम से कम 48 घंटे पहले नहीं दी गई, जो संसद के नियमों के खिलाफ है.
CAPF bill 2026 – TMC सांसद डेरेक ओब्रायन ने सदन में इस मुद्दे को उठाया और कहा कि नियमों का पालन होना चाहिए. इसके बाद TMC समेत कई विपक्षी दलों ने वॉकआउट कर दिया. विपक्षी पार्टियों मे कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CPI-M) इन सभी ने कहा कि सरकार जल्दबाजी में कानून न बनाए. कानून बनाने से पहले उस पर विचार न करें. जल्दबाजी करने से कोई फायदा नहीं होगा.
विरोध के कारण नहीं हो पाया विधेयक पेश
संसद में विपक्ष के विरोध प्रदर्शन और वॉक आउट के सरकार ने फिलहाल बिल को पेश करने से रोक दिया. इसके बाद गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्षी नेताओं के साथ बैठक कर सहमति बनाने की कोशिश की. हालांकि अब यह कब पेश किया जाएगा. सरकार कोशिश में लगी हुई है कि विपक्ष को साथ लिया जाए, इसके साथ ही उनका विरोध कम किया जाए.
क्या है सरकार यह बिल?
सरकार ने किस विधेयक को पेश करने की कोशिश की थी. उसमें 5 केंद्रीय सुरक्षा बलों को एक ढांचे में लाने का प्रस्ताव करता है. इनमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल , इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस , सशस्त्र सीमा बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में भर्ती, प्रमोशन और पोस्टिंग को एक जैसा बनाना है.
