बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर अब बदल चुकी है. राजधानी पटना का इंदिरा गांधी आयुर्वेद संस्थान (आईजीआईएमएस) न सिर्फ राज्य में बल्कि पूर्वोत्तर भारत के बड़े अस्पतालों में शुमार हो (picture of health services changed) चुका है. स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की परिकल्पनाओं पर आधारित कुल 1050 करोड़ रुपये की लागत से आईजीआईएमएस के कायाकल्प की योजना अब अपने अंतिम चरण में है. स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय शुक्रवार को आईजीआईएमएस परिसर में चहारदीवारी, कंक्रीट सड़क, नाला और केबल ट्रेंच निर्माण कार्य का शिलान्यास कर रहे थे.

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि इस परियोजना पर कुल 16 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. शिलान्यास समारोह की अध्यक्षता दीघा विधानसभा क्षेत्र के स्थानीय विधायक संजीव चौरसिया ने की. जबकि इस मौके पर आईजीआईएमएस के निदेशक डॉ. बिंदे कुमार, बिहार मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक धर्मेन्द्र कुमार, अस्पताल अधीक्षक डॉ. मनीष मण्डल समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे.

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने आईजीआईएमएस को पूर्वी भारत के सुपर स्पैशलिटी अस्पताल के रूप में विकसित करने के लिए कुल 1050 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. इनमें 750 करोड़ रुपये की योजना बनकर तैयार हो चुकी है और अगले महीने उसका लोकार्पण कर दिया जाएगा, जबकि 300 करोड़ की योजनाओं को सरकार की स्वीकृति मिल चुकी है और उसे अगले कुछ महीनों में पूरा कर लिया जाएगा.

picture of health services changed – आईजीआईएमएस में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए सीटों की संख्या बढ़कर अब 150 हो चुकी है. यहां फिलहाल कुल 1700 बेड उपलब्ध हैं. जबकि जल्द ही 1700 और नए बेड की व्यवस्था की जा रही है. ऐसे में यहां मरीजों के लिए बेड की कुल संख्या 3400 हो जाएगी.

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