देशभर में आज बैशाख के साथ-साथ बुद्ध पूर्णिमा मनाई जा रही है. . ये बेहद पवित्र और आध्यात्मिक पर्व में से एक है. यह दिन भगवान गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण का गवाह है इसलिए यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि मानवता को सही मार्ग दिखाने वाला दिवस भी कहा जाता है. यह (read the story of lord Buddha) महात्मा बुद्ध की 2588वीं जयंती है. माना जाता है कि इस दिन जो भी श्रद्धालु भगवान बुद्ध की विधिपूर्वक पूजा करता है और कथा पढ़ता है उसे जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है.

read the story of lord Buddha – द्रिक पंचांग के मुताबिक, पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ 30 अप्रैल को शाम 09:12 बजे शुरू हुई है तिथि आज शाम 10:52 बजे समाप्त होगी. इस दौरान देशभर में भगवान बुद्ध की जयंती को मनाया जा रहा है.

बुद्ध पूर्णिमा कथा

बहुत समय पहले कपिलवस्तु के राजा शुद्धोधन और रानी माया देवी के घर एक पुत्र का जन्म हुआ. ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की कि यह बालक या तो महान राजा बनेगा या एक महान संत. राजा ने उसे संसार के दुखों से दूर रखने की पूरी कोशिश की, लेकिन एक दिन सिद्धार्थ ने बाहर निकलकर चार दृश्य देखे, जिसमें एक वृद्ध व्यक्ति, एक बीमार व्यक्ति, एक मृत शरीर और एक सन्यासी है. इन दृश्यों ने उनके मन को झकझोर दिया. उन्होंने समझ लिया कि जीवन में दुख अनिवार्य है. तब उन्होंने राजमहल छोड़कर सत्य की खोज शुरू की. कई वर्षों की कठोर तपस्या के बाद, बोधगया में पीपल के वृक्ष के नीचे ध्यान करते हुए उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई. उसी क्षण वे गौतम बुद्ध बन गए. उन्होंने दुनिया को चार आर्य सत्य और अष्टांग मार्ग का उपदेश दिया, जो आज भी जीवन को सरल और शांत बनाने का मार्ग दिखाते हैं.

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