शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। हाल ही में, कमिश्नरेट और देहाती पुलिस के उच्च अधिकारियों ने भारी पुलिस बल के साथ (Bikram Majithia Case) उनके ग्रीन एवेन्यू स्थित निवास पर छापेमारी की। हालांकि, मजीठिया वहां नहीं मिले, लेकिन पुलिस लगातार उनके अन्य संभावित ठिकानों पर भी दबिश दे रही है। गिरफ्तारी से बचने के लिए मजीठिया ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
📂 क्या है मजीठा थाने का पूरा विवाद?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह विवाद 30 मई 2026 को शुरू हुआ, जब मजीठा पुलिस ने जोबनप्रीत सिंह नाम के आरोपी को एक मुकद्दमे में गिरफ्तार किया था। आरोप है कि बिक्रम सिंह मजीठिया भारी भीड़ के साथ थाने पहुंचे और जबरन अंदर घुसने का प्रयास किया। एस.एस.पी. का दावा है कि भीड़ ने थाने के विभिन्न कमरों में जाकर सरकारी रिकॉर्ड और फाइलों के साथ छेड़छाड़ की। इस दौरान पुलिस कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की की गई, जिसके बाद आरोपी को पुन: गिरफ्तार कर स्थिति नियंत्रित की गई।
👮 विशेष टीम का गठन और जांच
इस संवेदनशील मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पुलिस ने एस.पी. और डी.एस.पी. रैंक के अधिकारियों के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध वीडियो फुटेज के आधार पर आधा दर्जन से अधिक लोगों की पहचान कर ली गई है। मौके पर मौजूद 4 से 5 दर्जन लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। जांच (Bikram Majithia Case) टीम अपनी रिपोर्ट सौंपने की तैयारी कर रही है, जिसके बाद ही अगली कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
