मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में सोमवार को धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद को लेकर सुनवाई हुई. इस दौरान कोर्ट को बताया गया कि विवादित स्मारक के धार्मिक स्वरूप पर (Bhojshala Dispute Case) भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) का रुख समय-समय पर विभिन्न याचिकाओं में दिए गए बयानों में असंगत रहा है

Bhojshala Dispute Case – मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में साफ लफ्जों में कहा कि जिसे पहले ही मस्जिद माना जा चुका है, उसे बार-बार मंदिर बताना व सिर्फ भ्रामक है बल्कि यह न्यायिक प्रक्रिया को गुमराह करने की कोशिश भी है. सुनवाई में इंटरविनर(Intervener) जकुल्ला की तरफ से ASI की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए.

 ‘ASI कोर्ट को गुमराह नहीं कर सकता’

मेनन ने कहा कि साल 1998 में ASI ने एक याचिका के जवाब में कहा था कि भोजशाला मंदिर है या मस्जिद, इस बारे में निश्चित तौर पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता, लेकिन आज ASI इस भोजशाला को मंदिर बता रहा है. उन्होंने कहा कि ASI किसी भी परिस्थिति में इस कोर्ट को गुमराह नहीं कर सकता. एक दिन आप कहते हैं कि यह मस्जिद नहीं है, फिर आप कहते हैं कि यह मंदिर नहीं है.

‘भवन कोई जीवित वस्तु नहीं है…’

इंदौर हाई कोर्ट की डबल बेंच, जिसमें जज विवेक शुक्ला और आलोक अवस्थी शामिल हैं. उनके सामने मेनन ने साफ कहा कि किसी भी संरचना की पहचान मनमाने तरीके से बदलना मुमकिन नहीं है. उन्होंने कहा कि भवन कोई जीवित वस्तु नहीं है जिसका स्वरूप अपनी मर्जी के मुताबिक बदल दिया जाए. उन्होंने कहा कि इसके लिए ठोस सबूत जरूरी हैं.

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