सुकमा : बस्तर के जंगलों, ऊबड़ खाबड़ पगडंडियों और गोलियों की गूंज से थर्राते इलाकों में अब एक नई आवाज सुनाई देने वाली है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की. यह केवल (AI revolution in Naxalgarh) तकनीक की दस्तक नहीं, बल्कि उम्मीद, बदलाव और नए सवेरे की आहट है.

सुकमा का नाम आते ही बरसों तक दिमाग में बारूदी सुरंगें, मुठभेड़ और शहादत की खबरें तैर जाती थीं. गांवों के बच्चे स्कूल से ज्यादा डर की कहानियां सुनते बड़े हुए. कई इलाकों में स्कूल भवन क्षतिग्रस्त हुए, तो कहीं पढ़ाई सुरक्षा बलों की निगरानी में चलती रही.

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 AI revolution in Naxalgarh – ऐसे माहौल में पोटाकेबिन स्कूल बच्चों के लिए सुरक्षित आश्रय बने जहां वे पढ़ सकें, खेल सकें और सपने देख सकें. अब इन्हीं पोटाकेबिन में तकनीक का प्रवेश उस बदलाव की कहानी लिखने जा रहा है, जिसकी कल्पना कुछ वर्ष पहले तक असंभव लगती थी.

इस पहल को जमीन पर उतारने के लिए जिला प्रशासन ने लाइवलीहुड कॉलेज सुकमा में पोटाकेबिन स्कूलों के शिक्षकों के लिए विशेष कार्यशाला का आयोजन किया है. इस कार्यशाला में शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मूल सिद्धांत, आधुनिक टूल्स, डिजिटल कंटेंट निर्माण और बच्चों के लिए सरल प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण पद्धति से परिचित कराया जा रहा है.

 

 

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