चंडीगढ़ : हरियाणा में नर्सिंग स्टाफ और राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया के बीच उपजा विवाद अंततः रेणु भाटिया के इस्तीफे पर जाकर रुका। नर्सिंग संगठनों के देशव्यापी विरोध और अस्पतालों में चली पेन-डाउन हड़ताल के दबाव के बाद उन्होंने मंगलवार देर रात अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को भेज दिया। हालांकि, इस्तीफे (Renu Bhatia’s resignation) के बाद भी स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।
क्यों थम नहीं रहा नर्सों का गुस्सा?
इस्तीफे के बावजूद हरियाणा नर्सिंग फेडरेशन और आंदोलनकारी नर्सों का रुख सख्त है। उनका कहना है कि पद से इस्तीफा देना समस्या का समाधान नहीं है। नर्सिंग स्टाफ की मांग है कि रेणु भाटिया ने नर्सिंग बिरादरी के लिए जो अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया, उसके लिए उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी होगी। इस्तीफे से ठीक पहले भी रेणु भाटिया ने माफी मांगने से इनकार कर दिया था, जिसे लेकर नर्सों में भारी आक्रोश है।
विवाद की जड़: LNJP अस्पताल का मामला
यह विवाद कुरुक्षेत्र के एलएनजेपी अस्पताल में एक नाबालिग बच्ची के साथ हुए दुर्व्यवहार के मामले में शुरू हुआ। जांच के लिए पहुंची रेणु भाटिया ने ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ को कड़ी फटकार लगाई थी और उन पर बेहद अपमानजनक टिप्पणियां की थीं। नर्सों का तर्क है कि ओपीडी में उनकी उपस्थिति अनिवार्य नहीं होती, फिर (Renu Bhatia’s resignation) भी उन्हें बिना वजह दोषी ठहराया गया, जिससे पूरे पेशे का आत्मसम्मान आहत हुआ।


