उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने आधुनिक समाज में तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास के गहरे और जानलेवा प्रभाव को उजागर कर दिया है. सदर बाजार क्षेत्र के तेली मोहल्ले में एक रिटायर्ड शिक्षा विभाग के कर्मचारी ने अपनी बेटी की मौत के बाद 5 महीनों तक उसका शव घर में ही रखा. बाहरी दुनिया को (scary truth of ghost bungalow) भनक तक नहीं लगने दी. शव से आने वाली दुर्गंध को छिपाने के लिए पिता उस पर लगातार परफ्यूम छिड़कता रहा.
scary truth of ghost bungalow – दरअसल, इस मामले का खुलासा तब हुआ जब आरोपी पिता उदय भानू विश्वास के परिजनों ने करीब छह महीने से बंद पड़े उसके मकान का दरवाजा खुलवाया. अंदर का नजारा देख लोगों के होश उड़ गए. घर किसी ‘भूत बंगले’ में तब्दील हो चुका था.
नवंबर में हुई थी मौत, परफ्यूम से छिपाई बदबू
पूछताछ के दौरान उदय भानू ने बताया कि उसकी बेटी प्रियंका अक्टूबर 2025 के बाद से घर से बाहर नहीं निकली थी और नवंबर में उसकी मौत हो गई. बेटी की मौत के बाद भी अंविश्वास और मानसिक असंतुलन के चलते उसने अंतिम संस्कार नहीं किया. वह शव पर परफ्यूम छिड़ककर बदबू दबाने की कोशिश करता रहा. इसके बाद वह मकान में ताला लगाकर हरिद्वार और देहरादून चला गया. जब भी रिश्तेदार प्रियंका के बारे में पूछते, वह उसके इलाज चलने का झूठा बहाना बना देता था.
पत्नी की मौत और तंत्र-मंत्र का जाल
जांच में यह कड़वा सच सामने आया कि आरोपी पिता का मानसिक पतन साल 2013 में उसकी पत्नी की आत्महत्या के बाद शुरू हुआ. उसे शक था कि उसके रिश्तेदारों ने तंत्र-मंत्र (काला जादू) करके उसकी पत्नी को उससे छीन लिया है. इसी डर और शक के चलते उसने बेटी प्रियंका के साथ खुद को दुनिया से काट लिया. जुलाई 2025 में जब प्रियंका की तबीयत बिगड़ी, तो वह डॉक्टर के पास जाने के बजाय तांत्रिक क्रियाओं और झाड़-फूंक में उलझ गया, जिससे उसकी हालत और बिगड़ती गई.


