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भारतीय वेशभूषा: संस्कृति का एक अद्भुत रूप

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भारतीय वेशभूषा: संस्कृति का एक अद्भुत रूप

भारतीय संस्कृति भारत में मौजूद सभी धर्मों और समुदायों की संस्कृतियों को दर्शाती है| भारत एक अतुल्य देश है जिसकी अनेकता में एकता है| भारत की भाषाएं, धर्म, नृत्य, संगीत, वास्तुकला, भोजन और रीति-रिवाज सभी भिन्न- भिन्न तरीके के हैं| यहाँ आपको विभिन्न तरह के व्यंजनों और भाषाओं के साथ फैशन की भी एक बहुत बड़ी श्रृंखला देखने को मिलती है| भारतीय संस्कृति को कई संस्कृतियों के सम्मलेन के रूप में जाना जाता है| इतिहास में यह भारतीय संस्कृति कई सदियों पुरानी है|

भारत में फैशन न केवल राज्य द्वारा विभाजित होते हैं, बल्कि राज्य के भीतर विभिन्न धर्मों, जनजातियों और समुदायों के अनुसार भी भिन्न होते हैं| भारत की विविध संस्कृतियों के कई तत्व, जैसे कि भारतीय धर्म, पहनावा, व्यंजन, भाषा, मार्शल आर्ट, नृत्य, और संगीत दुनिया भर में गहरा प्रभाव डालते हैं|

कुछ भारतीय राज्यों में पाए जाने वाले विभिन्न कपड़ों और फैशन के बारे में आज हम आपको बताएँगे|

असम :- असम का पहनावा काफी चमकदार रंगो से युक्त होता है| यहाँ की सिल्क की साड़ियां भारत में अत्यंत लोकप्रिय हैं और पूरे देश में इसकी मांग है| असम में सबसे ज़्यादा प्रसिद्ध पहनावा मेखला हैं जिन्हे महिलाएं पहनती हैं, और यहाँ की मुगा कलाकारी भी बहुत अद्वितीय है| जिसमें हरे, लाल, पीले, और गुलाबी रंगो का प्रयोग किया जाता है|

दुल्हन के कपड़ों को चांदी और सुनहरे धागों से सजाया जाता है, ताकि दुल्हन अपनी शादी के दिन सुंदर दिखे| यहाँ पुरुषों द्वारा पहनी जाने वाली पोशाक धोती है| बोडो जनजाति की महिलाएं मेखला को चादर के साथ पहनती हैं| यहाँ पहने जाने वाले सभी पारम्परिक पौशाकों को रेशम से बनाया जाता है| साड़ी और मेखला बनाने के लिए पाट, एरी और गोल्डन मुगा जैसे रेशम का उपयोग किया जाता है|

पश्चिम बंगाल:– जिस तरह पश्चिम बंगाल अपने भोजन की वजह से विख्यात है, ठीक उसी तरह अपने पहनावे के लिए भी प्रसिद्ध है| यहाँ सबसे लोकप्रिय पोशाक साड़ी ही है परन्तु वहां साड़ी को पहनने के कई विभिन्न तरीके हैं| बंगाली महिलाओं की बंगाली साड़ी और उनकी छवि पश्चिम बंगाल को परिभाषित करती है| वहां की पारम्परिक साड़ी को सतनापुरी कहा जाता है|

यहाँ ज़्यादातर सफ़ेद और लाल रंग की साड़ियां पहनी जाती हैं| इन साड़ियों में पल्लू को कैरी करने का काफी अलग अंदाज़ होता है| पुरुष पोशाक में केवल धोती कुर्ता ही प्रचलित है| धोती पहने का ढंग भी काफी अलग है| यहाँ अक्सर धोती के एक सिरे को खुला छोड़ा जाता है और हाथ में पकड़ा जाता है, जो व्यक्ति की सामाजिक स्थिति दर्शाती है|

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सिक्किम:– सिक्किम अपनी पारंपरिक पोशाक के लिए प्रसिद्ध है| भारत में अन्य जनजातियों के विपरीत सिक्किम का भूटिया पहनावा बहुत अलग है| नागालैंड के राजवंश द्वारा सिक्किम पारंपरिक पोशाक को बढ़ावा दिया गया था| यहाँ के पुरुष एक शंबो नामक कपड़े की शर्ट और ढीला पजामा पहनते है, जो एक ट्राउज़र जैसा ढीला ढाला होता है| यहाँ की भूटिया महिलाएं पहनावे में पुरुष की तुलना में बहुत अधिक दर्जा प्राप्त करती हैं|

यहाँ की महिलाएं पूरे आस्तीन के रेशम ब्लाउज पहनती है और इसके साथ बहुरंगी ऊनी कपड़े की एक ढीली चादर साड़ी की तरह बांधती है| जिसे ‘पैंगडन’ कहा जाता है| जो एक विवाहित महिला का प्रतीक है| यह पारंपरिक पोशाक कढ़ाई वाले चमड़े के जूते और कुशन, एक जैकेट द्वारा पूरक है|

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राजस्थान:- राजस्थान एक ऐसा राज्य है जो बहुत सूखा रहता है| इस डलनेस को हटाने के लिए वहां की महिलाएं काफी चमकीले कपड़े पहनती हैं| सिर से पैर तक हर चीज जैसे पगड़ी, गहने, जूते और कपड़े राजस्थानी धर्म, पहचान और सामाजिक और आर्थिक स्थिति को दर्शाते हैं| यहाँ की महिलाएं रंग बिरंगे घाघरा या कुर्ती (ब्लाउज और टॉप) नामक एक लंबी स्कर्ट पहनती हैं| जिसके साथ सिर पर वे ओढ़नी ओढ़ती है जो की घाघरे के रंग के अनुसार होती है|

राजस्थान में महिलाओं के बीच बहुत प्रसिद्ध हैं, ज्यादातर कपास, रंगीन और लाहरिया, चुनरी और मोथरा प्रिंट के साथ डिजाइन किए गए हैं| शादी शुदा महिलाओं को घूँघट डालके रखना होता है और साथ ही वहां पैरो की बिछिया, बोरला और नाथों की काफी ज़्यादा मान्यता है| वहां के पुरुष कुर्ता पहनते हैं जिसके साथ पगड़ी की सबसे ज़्यादा मान्यता है| वहां के राज घरानो में पगड़ी और जूतियां पहनी जाती है|

पंजाब:- भारत एक रंगीन भूमि है और पंजाब इस खूबसूरत देश के पारंपरिक रूप से समृद्ध राज्यों में से एक है| पंजाब के असाधारण कपड़े यहाँ की जीवन शैली और भारतीय संस्कृति को दर्शाते हैं| चूड़ीदार कुर्ता और पटियाला सलवार ही ऐसे पोषक हैं जो पंजाब की महिलाओं द्वारा भी पहने जाते हैं| पटियाला सलवार की उत्पत्ति इसी राज्य से हुई है|अब इसे पूरे भारत में अधिकांश युवा लड़कियों कुर्ता और पटियाला सलवार के साथ रंगीन दुपट्टे के साथ पहनती है|

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पटियाला सलवार की उत्पत्ति इसी राज्य से हुई है| यहाँ की महिलाएं भी घाघरा पहनती हैं, जबकि पुरुष कुर्ता पजामा पहनते हैं,और कुर्ते के साथ लुंगी जैसी पोशाक भी शामिल होती है| अपने कपड़ों के अनुसार पगड़ी के अलग-अलग रंग पहनते हैं| पंजाब जूतों की अपनी विशिष्ट शैली के लिए जाना जाता है, जैसे जूतियों को पूरे देश में किसी भी फॉर्मल त्यौहार या अवसर पर पहना जाता है|

केरल:- केरल के पारंपरिक कपड़े वहाँ के लोगों की सादगी दर्शाता है| केरल में महिलाएं और पुरुष ज्यादातर सफ़ेद पोशाक पहनना ज्यादा पसंद करते है| यहाँ का सबसे लोकप्रिय जातीय पहनावा मुंडू है| जिसे शरीर के निचले हिस्से में कमर से पैर तक पहना जाता है| यह ज्यादातर पुरुषों द्वारा पहना जाता है, मुंडू एक लुंगी है जिसे केरल में सभी पुरुष पहनते हैं| इसमें स्वर्ण जरी का काम होता है जो पुरुषों और महिलाओं के लिए रॉयल्टी का प्रतिनिधित्व करती हैं|

यह पोशाक केरल, तुलुनाडु क्षेत्र और मालदीव द्वीपों में पहनी जाती है| इस कपड़े को औपचारिक और अनौपचारिक दोनों अवसरों पर पहना जा सकता है और साथ ही महिलाओं के लिए भी कई विभिन्न पोषक है| यहाँ भी महिलाओं द्वारा साड़ी ही पहनी जाती है| जो पूरी तरह से शुद्ध कपास से तैयार की जाती है और गर्मी के मौसम में आरामदायक होती है| अक्सर यहाँ कांचीपुरम सिल्क या बनारसी सिल्क से बनी साड़ियां ही पहनी जाती हैं|

Image Source : Google