प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रशासन के बीच मामला सुलझता नजर नहीं आ रहा है. अब इस मामले में मेला प्राधिकरण द्वारा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को (reply to administrations notice) सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब मांगा गया है. उन्हें मेला प्रशासन द्वारा ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य न माने जाने को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का जवाब भी सामने आया है.
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वतीने दावा किया है कि बाकी दो पीठों द्वारका पीठ और श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य मुझे शंकराचार्य कहते हैं. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि पिछले माघ मेले में हमको साथ लेकर दोनों शंकराचार्य स्नान कर चुके हैं. उन्होंने कहा कि जब श्रृंगेरी और द्वारका के शंकराचार्य यह कह रहे हैं कि हम शंकराचार्य हैं तो आखिर किस प्रमाण की आवश्यकता है कि हम शंकराचार्य हैं कि नहीं?
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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि क्या अब यह प्रशासन तय करेगा कि हम शंकराचार्य हैं कि नहीं? उन्होंने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि क्या उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री या भारत का राष्ट्रपति तय करेगा कि शंकराचार्य कौन है? उन्होंने कहा कि भारत के राष्ट्रपति को भी यह अधिकार नहीं है कि वह यह तय करें कि शंकराचार्य कौन है?
reply to administrations notice – स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि शंकराचार्य का निर्णय शंकराचार्य करते हैं. उन्होंने कहा कि हम निर्णीत हैं, क्योंकि पुरी के शंकराचार्य ने हमारे बारे में कुछ नहीं कहा है. उन्होंने न तो यह कहा कि वह शंकराचार्य नहीं हैं और न ही यह कहा कि शंकराचार्य हैं. पुरी के शंकराचार्य इस मामले में साइलेंट हैं.


